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शनिवार, 2 जुलाई 2022

फेंक जहां तक भाला जाए

कब तक बोझ संभाला जाए?

द्वंद्व कहां तक पाला जाए?

दूध छीन बच्चों के मुख से

क्यों नागों को पाला जाए?

दोनों ओर लिखा हो भारत 

सिक्का वही उछाला जाए!

तू भी है राणा का वंशज,

फेंक जहां तक भाला जाए!

 

इस बिगड़ैल पड़ोसी को तो,

फिर शीशे में ढाला जाए!

तेरे मेरे दिल पर ताला

राम करें ये ताला जाए!

वाहिद के घर दीप जले तो,

मंदिर तलक उजाला जाए!


कब तक बोझ संभाला जाए?

युद्ध कहां तक टाला जाए?

तू भी राणा का वंशज,

फेंक जहां तक भाला जाए!


English Translation

For how long shall we bear the burden?

For how long shall we try to harbour enmity?

Snatching the milk away from children,

For how long shall we feed snakes?

On whose both sides is written India,

that coin only we should use for any toss [e.g. must take care of Indian interests]

After all, you are lineage of Rana Pratap,

Go ahead, throw the jevelin as far as you can


This errant neighbours must be,

set in its place

This lock on our hearts,

must be wished away

Light in lamp in my house,

must light the nearest temple


For how long shall we bear the burden?

For how long shall we try to delay the inevitable confrontation?

After all, you are lineage of Rana Pratap,

Go ahead, throw the jevelin as far as you can

गुरुवार, 24 दिसंबर 2020

मिट्टी भी चन्दन है राजस्थानी

दोहराता हूँ सुनों रक्त से लिखी हुई कुर्बानी |

जिसके कारण मिट्टी भी चन्दन है राजस्थानी ||


रावल रत्न सिंह को छल से कैद किया खिलजी ने

काल गई मित्रों से मिलकर दाग किया खिलजी ने

खिलजी का चित्तौड़ दुर्ग में एक संदेशा आया

जिसको सुनकर शक्ति शौर्य पर फिर अँधियारा छाया

दस दिन के भीतर न पद्मिनी का डोला यदि आया

यदि ना रूप की रानी को तुमने दिल्ली पहुँचाया

तो फिर राणा रत्न सिंह का शीश कटा पाओगे

शाही शर्त ना मानी तो पीछे पछताओगे


दारुन संवाद लहर सा दौड़ गया रण भर में

यह बिजली की तरक छितर से फैल गया अम्बर में

महारानी हिल गयीं शक्ति का सिंघासन डोला था

था सतीत्व मजबूर ज़ुल्म विजयी स्वर में बोला था


रुष्ट हुए बैठे थे सेनापति गोरा रणधीर

जिनसे रण में भय कहती थी खिलजी की शमशीर

अन्य अनेको मेवाड़ी योद्धा रण छोड़ गए थे

रत्न सिंह के संध नीद से नाता तोड़ गए थे

पर रानी ने प्रथम वीर गोरा को खोज निकाला

वन वन भटक रहा था मन में तिरस्कार की ज्वाला


गोरा से पद्मिनी ने खिलजी का पैगाम सुनाया

मगर वीरता का अपमानित ज्वार नहीं मिट पाया

बोला मैं तो बहुत तुक्ष हूँ राजनीती क्या जानू

निर्वासित हूँ राज मुकुट की हठ कैसे पहचानू

बोली पद्मिनी समय नहीं है वीर क्रोध करने का

अगर धरा की आन मिट गयी घाव नहीं भरने का

दिल्ली गई पद्मिनी तो पीछे पछताओगे

जीतेजी राजपूती कुल को दाग लगा जाओगे

राणा ने को कहा किया वो माफ़ करो सेनानी

यह कह कर गोरा के क़दमों पर झुकी पद्मिनी रानी


यह क्या करती हो गोरा पीछे हट बोला

और राजपूती गरिमा का फिर धधक उठा था शोला

महारानी हो तुम सिसोदिया कुल की जगदम्बा हो

प्राण प्रतिष्ठा एक लिंग की ज्योति अग्निगंधा हो

जब तक गोरा के कंधे पर दुर्जय शीश रहेगा

महाकाल से भी राणा का मस्तक नहीँ कटेगा

तुम निश्चिन्त रहो महलो में देखो समर भवानी

और खिलजी देखेगा केसरिया तलवारो का पानी

राणा के सकुशल आने तक गोरा नहीँ मरेगा

एक पहर तक सर कटने पर धड़ युद्ध करेगा

एक लिंग की शपथ महाराणा वापस आएंगे

महा प्रलय के घोर प्रबन्जन भी न रोक पाएंगे


शब्द शब्द मेवाड़ी सेनापति का था तूफानी

शंकर के डमरू में जैसे जाएगी वीर भवानी

दोहराता हूँ सुनों रक्त से लिखी हुई कुर्बानी |

जिसके कारण मिट्टी भी चन्दन है राजस्थानी ||


खिलजी मचला था पानी में आग लगा देने को

पर पानी प्यास बैठा था ज्वाला पी लेने को

गोरा का आदेश हुआ सज गए सात सौ डोले

और बाँकुरे बादल से गोरा सेनापति बोले

खबर भेज दो खिलजी पर पद्मिनी स्वयं आती हैं

अन्य सात सौ सखियाँ भी वो साथ लिए आती हैं


स्वयं पद्मिनी ने बादल का कुमकुम तिलक किया था

दिल पर पत्थर रख कर भीगी आँखों से विदा किया था

और सात सौ सैनिक जो यम से भी भीड़ सकते थे

हर सैनिक सेनापति था लाखों से लड़ सकते थे

एक-एक कर बैठ गए सज गयी डोलियां पल में

मर मिटने की होड़ लग गयी थी मेवाड़ी दल में

हर डोली में एक वीर था चार उठाने वाले

पांचो ही शंकर के गण की तरह समर मतवाले

बज कूच शंख सैनिकों ने जयकार लगाई

हर हर महादेव की ध्वनि से दसों दिशा लहराई


गोरा बादल के अंतस में जगी जोत की रेखा

मातृभूमि चित्तौड़ दुर्ग को फिर जी भरकर देखा

कर प्रणाम चढ़े घोड़ों पर सुभग अभिमानी

देश भक्ति की निकल पड़ें लिखने वो अमर कहानी

दोहराता हूँ सुनों रक्त से लिखी हुई कुर्बानी |

जिसके कारण मिट्टी भी चन्दन है राजस्थानी ||


जा पहुंचे डोलियां एक दिन खिलजी के सरहद में

उधर दूत भी जा पहुंच खिलजी के रंग महल में

बोला शहंशाह पद्मिनी मल्लिका बनने आयी है

रानी अपने साथ हुस्न की कलियाँ भी लायी है

एक मगर फ़रियाद उसकी फ़कत पूरी करवा दो

राणा रत्न सिंह से एक बार मिलवा दो

खिलजी उछल पड़ा कह फ़ौरन यह हुक्म दिया था

बड़े शौख से मिलने का शाही फरमान दिया था


वह शाही फरमान दूत ने गोरा तक पहुँचाया

गोरा झूम उठे छन बादल को पास बुलाया

बोले बेटा वक़्त आ गया अब काट मरने का

मातृभूमि मेवाड़ धरा का दूध सफल करने का

यह लोहार पद्मिनी भेष में बंदी गृह जायेगा

केवल दस डोलियां लिए गोरा पीछे ढायेगा

यह बंधन काटेगा हम राणा को मुख्त करेंगे

घोड़सवार उधर आगे की खी तैयार रहेंगे

जैसे ही राणा आएं वो सब आंधी बन जाएँ

और उन्हें चित्तौड़ दुर्ग पर वो सकुशल पहुंचाएं

अगर भेद खुल गया वीर तो पल की देर न करना

और शाही सेना पहुंचे तो बढ़ कर रण करना

राणा जाएं जिधर शत्रु को उधर न बढ़ने देना

और एक यवन को भी उस पथ पावँ ना धरने देना

मेरे लाल लाडले बादल आन न जाने पाएं

तिल-तिल कट मरना मेवाड़ी मान न जाने पाएं


ऐसा ही होगा काका राजपूती अमर रहेगी

बादल की मिट्टी में भी गौरव की गंध रहेगी


तो फिर आ बेटा बादल सीने से तुझे लगा लूँ

हो ना सके शायद अब मिलन अंतिम लाड लड़ा लूँ

यह कह बाँहों में भर कर बादल को गले लगाया

धरती काँप गयी अम्बर का अंतस मन भर आया


सावधान कह पुन्ह पथ पर बढ़ें गोरा सैनानी

पूँछ लिया झट से बढ़ कर के बूढी आँखों का पानी

दोहराता हूँ सुनों रक्त से लिखी हुई कुर्बानी |

जिसके कारण मिट्टी भी चन्दन है राजस्थानी ||

 

गोरा की चातुरी चली राणा के बंधन काटे

छांट-छांट कर शाही पहरेदारों के सर काटे

लिपट गए गोरा से राणा गलती पर पछताए

सेनापति की नमक खलाली देख नयन भर आये


पर खिलजी का सेनापति पहले से ही शंकित था

वह मेवाड़ी चट्टानी वीरों से आतंकित था

जब उसने लिया समझ पद्मिनी नहीँ आयी है

मेवाड़ी सेना खिलजी की मौत साथ लायी है

पहले से तैयार सैन्य दल को उसने ललकारा

निकल पड़ा तिधि दल का बजने लगा नगाड़ा


दृष्टि फिरि गोरा की राणा को समझाया

रण मतवाले को रोका जबरन चित्तौड़ पठाया

राणा चलें तभी शाही सेना लहरा कर आयी

खिलजी की लाखो नंगी तलवारें पड़ी दिखाई

खिलजी ललकारा दुश्मन को भाग न जाने देना

रत्न सिंह का शीश काट कर ही वीरों दम लेना

टूट पड़ों मेवाड़ी शेरों बादल सिंह ललकारा

हर हर महादेव का गरजा नभ भेदी जयकारा

निकल डोलियों से मेवाड़ी बिजली लगी चमकने

काली का खप्पर भरने तलवारें लगी खटकने


राणा के पथ पर शाही सेना तनिक बढ़ा था

पर उस पर तो गोरा हिमगिरि सा अड़ा खड़ा था

कहा ज़फर से एक कदम भी आगे बढ़ न सकोगें

यदि आदेश न माना तो कुत्ते की मौत मरोगे

रत्न सिंह तो दूर ना उनकी छाया तुम्हें मिलेगी

दिल्ली की भीषण सेना की होली अभी जलेगी


यह कह के महाकाल बन गोरा रण में हुंकारा

लगा काटने शीश बही समर में रक्त की धारा

खिलजी की असंख्य सेना से गोरा घिरे हुए थे

लेकिन मानो वे रण में मृत्युंजय बने हुए थे

पुण्य प्रकाशित होता है जैसे अग्रित पापों से

फूल खिला रहता असंख्य काटों के संतापों से

वो मेवाड़ी शेर अकेला लाखों से लड़ता था

बढ़ा जिस तरफ वीर उधर ही विजय मंत्र बढ़ता था

इस भीषण रण से दहली थी दिल्ली की दीवारें

गोरा से टकरा कर टूटी खिलजी की तलवारें


मगर क़यामत देख अंत में छल से काम लिया था

गोरा की जंघा पर अरि ने छिप कर वार किया था

वहीँ गिरे वीर वर गोरा जफ़र सामने आया

शीश उतार दिया धोखा देकर मन में हर्षाया

मगर वाह रे मेवाड़ी गोरा का धड़ भी दौड़ा

किया जफ़र पर वार की जैसे सर पर गिरा हतोड़ा

एक बार में ही शाही सेना पति चीर दिया था

जफ़र मोहम्मद को केवल धड़ ने निर्जीव किया था


ज्यों ही जफ़र कटा शाही सेना का साहस लरज़ा

काका का धड़ लख बादल सिंह महारुद्र सा गरजा

अरे कायरों नीच बाँगड़ों छल में रण करते हों

किस बुते पर जवान मर्द बनने का दम भरते हों

यह कह कर बादल उस छन बिजली बन करके टुटा था

मानो धरती पर अम्बर से अग्नि शिरा छुटा था

ज्वाला मुखी फहत हो जैसे दरिया हो तूफानी

सदियों दोहराएंगी बादल की रण रंग कहानी


अरि का भाला लगा पेट में आंते निकल पड़ी थीं

ज़ख़्मी बादल पर लाखों तलवारें खिंची खड़ी थी

कसकर बाँध लिया आँतों को केसरिया पगड़ी से

रण चक डिगा न वो प्रलयंकर सम्मुख मृत्यु खड़ी से

अब बादल तूफ़ान बन गया शक्ति बनी फौलादी

मानो खप्पर लेकर रण में लड़ती हो आज़ादी


उधर वीरवर गोरा का धड़ आर्दाल काट रहा था

और इधर बादल लाशों से भूदल पात रहा था

आगे पीछे दाएं बाएं जम कर लड़ी लड़ाई

उस दिन समर भूमि में लाखों बादल पड़े दिखाई

मगर हुआ परिणाम वहीँ की जो होना था

उनको तो कण-कण अरियों के सोन तामे धोना था

अपने सीमा में बादल सकुशल पहुँच गए थे

गोरा- बादल तिल-तिल कर रण में खेत गए थे


एक-एक कर मिटें सभी मेवाड़ी वीर सिपाही

रत्न सिंह पर लेकिन रंचक आँच न आने पाई

गोरा-बादल के शव पर भारत माता रोई थी

उसने अपनी दो प्यारी ज्वलंत मणिया खोईं थी

धन्य धरा मेवाड़ धन्य गोरा बादल अभिमानी

जिनके बल से रहा पद्मिनी का सतीत्व अभिमानी

दोहराता हूँ सुनों रक्त से लिखी हुई कुर्बानी |

जिसके कारण मिट्टी भी चन्दन है राजस्थानी ||

सोमवार, 4 मई 2020

है नमन उनको

है नमन उनको कि जो
यशकाय को अमरत्व देकर
इस जगत के शौर्य की
जीवित कहानी हो गये हैं

है नमन उनको कि जिनके
सामने बौना हिमालय
जो धरा पर गिर पड़े पर
आसमानी हो गये हैं

है नमन उस देहरी को
जिस पर तुम खेले कन्हैया
घर तुम्हारे परम तप
की राजधानी हो गये हैं

है नमन उनको कि जिनके
सामने बौना हिमालय

हमने भेजे हैं सिकन्दर
सिर झुकाए मात खाऐ
हमसे भिड़ते हैं वो जिनका
मन धरा से भर गया है

नर्क में तुम पूछना
अपने बुजुर्गों से कभी भी
सिंह के दाँतों से गिनती
सीखने वालों के आगे
शीश देने की कला में
क्या गजब है क्या नया है

जूझना यमराज से
आदत पुरानी है हमारी
उत्तरों की खोज में फिर
एक नचिकेता गया है

है नमन उनको कि जिनकी
अग्नि से हारा प्रभंजन
काल कौतुक जिनके आगे
पानी पानी हो गये हैं

है नमन उनको कि जिनके
सामने बौना हिमालय
जो धरा पर गिर पड़े पर
आसमानी हो गये हैं

लिख चुकी है विधि तुम्हारी
वीरता के पुण्य लेखे
विजय के उदघोष, गीता के
कथन तुमको नमन है

राखियों की प्रतीक्षा
सिन्दूरदानों की व्यथाऒं
देशहित प्रतिबद्ध यौवन
के सपन तुमको नमन है

बहन के विश्वास भाई
के सखा कुल के सहारे
पिता के व्रत के फलित
माँ के नयन तुमको नमन है

है नमन उनको कि जिनको
काल पाकर हुआ पावन
शिखर जिनके चरण छूकर
और मानी हो गये हैं

कंचनी तन, चन्दनी मन,
आह, आँसू, प्यार, सपने
राष्ट्र के हित कर चले सब
कुछ हवन तुमको नमन है

है नमन उनको कि जिनके
सामने बौना हिमालय
जो धरा पर गिर पड़े पर
आसमानी हो गये

बुधवार, 3 जनवरी 2018

ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं

ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं
है अपना ये त्यौहार नहीं
है अपनी ये तो रीत नहीं
है अपना ये व्यवहार नहीं

धरा ठिठुरती है सर्दी से
आकाश में कोहरा गहरा है
बाग़ बाज़ारों की सरहद पर
सर्द हवा का पहरा है

सूना है प्रकृति का आँगन
कुछ रंग नहीं , उमंग नहीं
हर कोई है घर में दुबका हुआ
नव वर्ष का ये कोई ढंग नहीं

चंद मास अभी इंतज़ार करो
निज मन में तनिक विचार करो
नये साल नया कुछ हो तो सही
क्यों नक़ल में सारी अक्ल बही

उल्लास मंद है जन -मन का
आयी है अभी बहार नहीं
ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं
है अपना ये त्यौहार नहीं

ये धुंध कुहासा छंटने दो
रातों का राज्य सिमटने दो
प्रकृति का रूप निखरने दो
फागुन का रंग बिखरने दो

प्रकृति दुल्हन का रूप धार
जब स्नेह – सुधा बरसायेगी
शस्य – श्यामला धरती माता
घर -घर खुशहाली लायेगी

तब चैत्र शुक्ल की प्रथम तिथि
नव वर्ष मनाया जायेगा
आर्यावर्त की पुण्य भूमि पर
जय गान सुनाया जायेगा

युक्ति – प्रमाण से स्वयंसिद्ध
नव वर्ष हमारा हो प्रसिद्ध
आर्यों की कीर्ति सदा -सदा
नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा

अनमोल विरासत के धनिकों को
चाहिये कोई उधार नहीं
ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं
है अपना ये त्यौहार नहीं
है अपनी ये तो रीत नहीं
है अपना ये त्यौहार नहीं




English Translation

We don't accept this new year
This is not our festival
This is not our custom
This is not our way of life

Earth is shivering from cold
Sky is very foggy
Borders of gardens and markets are
guarded by the Chilled air

Nature's cradle is barren
There is no colour, no enthusiasm
Everyone is crouched within home
This is no way for a new year

Wait for a few months
Think about it a little
New year must bring something new, doesn't it?
Why forget common sense in copying something

Everyone's heart is low on joy
It isn't spring season yet
We don't accept this new year
This is not our festival

Let the fog clear
Let darkness limit
Let Nature's beauty shine
Let colours of Spring open up

When Nature will shower love
like newlywed bride
Mother earth, our lush green earth
bring joy to everyone

Only then on first day of Chaitra Shukla month
we will celebrate new year
On blessed land of Aryavrat
song of victory will be sung

Self-sufficient logically and in implication
Our new work will be popular
As Arya's legacy lives on
New year is the first day of Chaitra Shukla month

Inheritors of invaluable inheritance
don't want any loan [festival]
We don't accept this new year
This is not our festival
This is not our custom
This is not our festival

गुरुवार, 8 सितंबर 2016

वह जीवन क्या जीवन है

वह जीवन भी क्या जीवन है, जो काम देश के आ ना सका
वह चंदन भी क्या चंदन है, जो अपना वन महका ना सका

जिसकी धरती पर जन्म लिया, जिसके समीर से साँस चली
जिसके अमृत से प्यास बुझी, जिसकी माटी में देह पली
वह क्या सपूत जो जन्मभूमि के, प्रति कर्तव्य निभा ना सका
वह जीवन...
वह चंदन...

मुनिवर दधिची हो गए अमर, जिनकी हड्डियों से वज्र बना
संकट समाज का दूर किया, देकर पावन शरीर अपना
वह मानव क्या समाज हित में, जो प्राण प्रसून चढ़ा ना सका
वह जीवन...
वह चंदन...

ऐसे महान चाणक्य जिन्होंने, चंद्रगुप्त का सृजन किया
अन्याई राजा को रोंधा, यूनानी शत्रु दमन किया
वह नाविक क्या जो तूफ़नो में, नौका पार लगा ना सका
वह जीवन...
वह चंदन...

राणा का जीवन जीवन था, जिसने महलों को छोड़ दिया
रोटियाँ घाँस की खावन में, आज़ादी का संघर्ष किया
वह देश प्रेम क्या देश प्रेम, जो कंटक पथ अपना ना सका
वह जीवन...
वह चंदन...

राणा के पास नहीं पैसा, पैसे के बिना नहीं सेना
तब भामाशाह बढ़ा आगे, लेकर रूपया पैसा गहना
वह धन क्या अवसर आने पर जो, त्याग भाव दिखला ना सका
वह जीवन...
वह चंदन...

वह जीवन...
वह चंदन...

English Translation

What life is that life, which couldn't be useful its country
What sandalwood is that sandalwood, which couldn't even make its forest fragrant

On whose land you were born, whose air you breathed
Whose nectar your drunk, whose soil your body played in
What son is that who couldn't fulfil his duties towards his motherland

Sage Dadhichi is immortal, whose bones were made into weapon
Who averted humanity's problem, by sacrificing his own own body
What man is that who cannot put down his life for benefit of humanity

Chanakya was great, for he raised Chandragupta
to fight with cruel king, and chased away greek enemy
What boatman is that who cannot sail his boat to coast during storms

What a life King Maharana Pratap's had, after leaving his palace
Even after eating roti of grass, he fought for his freedom
What patriotism is that which cannot choose path of hardship

Maharana didn't have money, and without money, couldn't have army
Then Bhamashah came up with all his wealth and jewellery
What money is that when needed couldn't be donated

सोमवार, 25 अगस्त 2014

वतन पे जो फ़िदा होगा

हिमाला की बुलंदी से, सुनो आवाज़ है आयी 
कहो माँओं से दें बेटे, कहो बहनो से दें भाई

वतन पे जो फिदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा
रहेगी जब तलक दुनियाँ, यह अफ़साना बयाँ होगा
वतन पे जो फिदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा

हिमाला कह रहा है इस नौजवानों से
खड़ा हूँ संतरी बनके मैं सरहद पे जमानो से
भला इस वक्त देखूँ कौन मेरा पासबाँ होगा 
वतन पे जो फिदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा

चमन वालों की गैरत को है सय्यदों  ललकारा
उठो हर फूल से कह दो की बन जाये वो अंगारा
नहीं तो दोस्तों रुसवा, हमारा गुलसिताँ होगा
वतन पे जो फिदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा

हमारे एक पडोसी ने, हमारे घर को लूटा है
भरम एक दोस्त की बस दोस्ती का ऐसे टूटा है
कि अब हर दोस्त पे दुनियाँ को दुश्मन का गुमा होगा
वतन पे जो फिदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा

सिपाही देता है आवाज, माताओं को बहनों को
हमें हथियार ले दो, बेच डालो अपने गहनों को
की इस कुर्बानी पे कुर्बा वतन का हर जवाँ होगा

वतन पे जो फिदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा
रहेगी जब तलक दुनियाँ, यह अफ़साना बयाँ होगा


English Translation
India's patriotic war-cry against Chinese Incusion of 1965

Voice calls over from the heights of Himalayas,
Let sons tell their mothers, let brothers assure their sisters,

The one who dies for motherland, will live forever.
And his story will be told, till humanity is alive.
The one who dies for motherland, will live forever.

Himalaya says to young men of this country,
I have been guardian of these borders for ages,
Let me see who dare to be my companion.
The one who dies for motherland, will live forever.

Hunters have dared pride of peaceful gardeners,
Ask every flower to become glowing hot cinder,
Otherwise, friends, our garden will be destroyed.

One of our neighbour has dared to rob our house,
Our illusion of friendship is broken,
And every friend will be looked suspiciously by the world,
The one who dies for motherland, will live forever

A soldier cries out for mothers and sisters,
And asks to buy weapons by selling their jewellery,
For every person of country should sacrifice for country.

The one who dies for motherland, will live forever.
And his story will be told, till humanity is alive.

गुरुवार, 14 अगस्त 2014

ऐ मेरे वतन के लोगों

ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है सब का, लहरा लो तिरंगा प्यारा

पर मत भूलो सीमा पर, वीरों ने हैं प्राण गवाँए
कुछ याद उन्हें भी करलो, जो लोट के घर ना आए

ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुरबानी

जब घायल हुआ हिमालय, खतरे में पडी आजादी
जब तक थी साँस लड़े वो, फिर अपनी लाश बिछा दी
संगीन पे धर पर माथा, सो गए अमर बलिदानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुरबानी

जब देश में थी दिवाली, वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली
क्या लोग थे वो दीवाने, क्या लोग थे वो अभिमानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुरबानी

कोई सिख कोई जाट मराठा, कोई गुरखा कोई मदरासी
सरहद पर मरने वाला, हर वीर था भारतवासी
जो खून गिरा पर्वत पर, वो खून था हिंदुस्तानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुरबानी

थी खून से लथ-पथ काया, फिर भी बंदूक उठाके
दस-दसको एक ने मारा, फिर गिर गए होश गवाँ के
जब अंत समय आया तो, कह गए की अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों, अब हम तो सफर करते हैं

थे धन्य जवान वो अपने, थे धन्य वो उनकी जवानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुरबानी
जय हिन्द, जय हिन्द की सेना
जय हिन्द, जय हिन्द, जय हिन्द

रविवार, 1 अप्रैल 2012

सारे जहाँ से अच्छा

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसतां हमारा

गुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में
समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा

परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का
वो संतरी हमारा, वो पासवां हमारा

गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियाँ
गुलशन है जिसके दम से, रश्क-ए-जिनां हमारा

ऐ आब-ए-रौंद-ए-गंगा! वो दिन है याद तुझको
उतरा तेरे किनारे, जब कारवां हमारा

मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्तां हमारा

यूनान, मिस्र, रोमां, सब मिट गए जहाँ से ।
अब तक मगर है बाकी, नाम-ओ-निशां हमारा

कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-जहाँ हमारा

'इक़बाल' कोई मरहूम, अपना नहीं जहाँ में
मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहां हमारा

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसतां हमारा ।

कदम कदम बढ़ाये जा

कदम कदम बढ़ाये जा
खुशी के गीत गाये जा
ये जिंदगी है क़ौम की
तू क़ौम पे लुटाये जा

तू शेर-ए-हिन्द आगे बढ़
मरने से तू कभी न डर
उड़ा के दुश्मनों का सर
जोश-ए-वतन बढ़ाये जा

कदम कदम बढ़ाये जा
खुशी के गीत गाये जा
ये जिंदगी है क़ौम की
तू क़ौम पे लुटाये जा

हिम्मत तेरी बढ़ती रहे
खुदा तेरी सुनता रहे
जो सामने तेरे खड़े
तू खाक में मिलाये जा

कदम कदम बढ़ाये जा
खुशी के गीत गाये जा
ये जिंदगी है क़ौम की
तू क़ौम पे लुटाये जा

चलो दिल्ली पुकार के
ग़म-ए-निशाँ संभाल के
लाल क़िले पे गाड़ के
लहराये जा लहराये जा

कदम कदम बढ़ाये जा
खुशी के गीत गाये जा
ये जिंदगी है क़ौम की
तू क़ौम पे लुटाये जा

और भी दूँ

मन समर्पित, तन समर्पित
और यह जीवन समर्पित
चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूँ

मॉं तुम्हारा ऋण बहुत है, मैं अकिंचन
किंतु इतना कर रहा, फिर भी निवेदन
थाल में लाऊँ सजाकर भाल में जब भी
कर दया स्वीकार लेना यह समर्पण

गान अर्पित, प्राण अर्पित
रक्त का कण-कण समर्पित
चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूँ

मॉंज दो तलवार को, लाओ न देरी
बॉंध दो कसकर, कमर पर ढाल मेरी
भाल पर मल दो, चरण की धूल थोड़ी
शीश पर आशीष की छाया धनेरी

स्वप्न अर्पित, प्रश्न अर्पित
आयु का क्षण-क्षण समर्पित।
चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूँ

तोड़ता हूँ मोह का बंधन, क्षमा दो
गॉंव मेरी, द्वार-घर मेरी, ऑंगन, क्षमा दो
आज सीधे हाथ में तलवार दे-दो
और बाऍं हाथ में ध्‍वज को थमा दो

सुमन अर्पित, चमन अर्पित
नीड़ का तृण-तृण समर्पित
चहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूँ



English Translation

My heart is surrendered, My body is too,
And my life too is surrendered,
But I still desire of giving something more, O my country

Mother, your loan is infinite, and I am destitute,
Yet, I beg you,
When I bring my head on a platter,
Have mercy and accept my gift

My songs are surrendered, My life is too
And every drop of my blood is surrendered,
But I still desire of giving something more, O my country

Shine my sword, Don't delay!
Tie the body armour tight on my waist,
Rub some dust from your esteemed feet on my forehead,
For your blessings are heavenly on my head

My dreams are surrendered, All questions too
And every moment of my life too is surrendered
But I still desire of giving something more, O my country

Forgive me, for I escape bond of love
Forgive me, my village, my home, my adobe,
Just give me sword to my right hand,
And give me flag to left hand

All flowers are surrendered, Whole garden too
And every blade of my nest too is surrendered
But I still desire of giving something more, O my country

पुष्प की अभिलाषा

चाह नहीं मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ

चाह नहीं, प्रेमी-माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊँ

चाह नहीं, सम्राटों के शव
पर हे हरि, डाला जाऊँ

चाह नहीं, देवों के सिर पर
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ

मुझे तोड़ लेना वनमाली
उस पथ पर देना तुम फेंक

मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पर जावें वीर अनेक



English Translation
Poem is from perspective of a flower, saying to its gardener

I don't desire to be part of ornaments of young women,
I don't desire to be part of garlands of lovers,
Oh God, I don't desire to be part of funeral procession of Kings,
Neither I desire to be offered to Gods in prayer, and feel proud of myself,
Just pluck me, O my gardener, and throw me on that path,
On which brave men journey to sacrifice their head for Motherland.

शुक्रवार, 30 मार्च 2012

वीर तुम बढ़े चलो

वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !

हाथ में ध्वजा रहे बाल दल सजा रहे
ध्वज कभी झुके नहीं दल कभी स्र्के नहीं
वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !

सामने पहाड़ हो सिंह की दहाड़ हो
तुम निडर डरो नहीं तुम निडर डटो वहीं
वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !

प्रात हो कि रात हो संग हो न साथ हो
सूर्य से बढ़े चलो चन्द्र से बढ़े चलो
वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !

एक ध्वज लिये हुए एक प्रण किये हुए
मातृ भूमि के लिये पितृ भूमि के लिये
वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !

अन्न भूमि में भरा वारि भूमि में भरा
यत्न कर निकाल लो रत्न भर निकाल लो
वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !

हम होंगे कामयाब

हम होंगे कामयाब एक दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन

हम चलेंगे साथ-साथ
डाल हाथों में हाथ
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन
मन में है विश्वास पूरा है विश्वास
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन

होंगी शांति चारो ओर
होंगी शांति चारो ओर
होंगी शांति चारो ओर एक दिन
मन में है विश्वास पूरा है विश्वास
होंगी शांति चारो ओर एक दिन

पंद्रह अगस्‍त

आज जीत की रात
पहरूए सावधान रहना!

खुले देश के द्वार
अचल दीपक समान रहना
प्रथम चरण है नये स्‍वर्ग का
है मंजिल का छोर
इस जन-मंथन से उठ आई
पहली रत्‍न हिलोर
अभी शेष है पूरी होना
जीवन मुक्‍ता डोर
क्‍योंकि नहीं मिट पाई दुख की
विगत सांवली कोर
ले युग की पतवार
बने अंबुधि महान रहना
आज जीत की रात
पहरूए सावधान रहना!

विषम श्रृखलाएं टूटी हैं
खुली समस्‍त दिशाएं
आज प्रभंजन बनकर चलतीं
युग-बंदिनी हवाएं
प्रश्‍नचिन्‍ह बन खड़ी हो गईं
यह सिमटी सीमाएं
आज पुराने सिंहासन की
टूट रही प्रतिमाएं
उठता है तूफान, इंदु तुम
दीप्तिमान रहना
आज जीत की रात
पहरूए सावाधान रहना!

ऊँची हुयी मशाल हमारी
आगे कठिन डगर है
शत्रु हट गया, लेकिन उसकी
छायाओं का डर है
शोषण से मृत है समाज
कमजोर हमारा घर है
किंतु आ रही नई जिंदगी
यह विश्‍वास अमर है
जनगंगा में ज्‍वार,
लहर तुम प्रवहमान रहना
आज जीत की रात
पहरूए, सावधान रहना!

कलम, आज उनकी जय बोल

जला अस्थियां बारी-बारी
चिटकाई जिनमें चिंगारी,
जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर
लिए बिना गर्दन का मोल।
कलम, आज उनकी जय बोल

जो अगणित लघु दीप हमारे
तूफानों में एक किनारे,
जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन
मांगा नहीं स्नेह मुंह खोल।
कलम, आज उनकी जय बोल

पीकर जिनकी लाल शिखाएं
उगल रही सौ लपट दिशाएं,
जिनके सिंहनाद से सहमी
धरती रही अभी तक डोल।
कलम, आज उनकी जय बोल

अंधा चकाचौंध का मारा
क्या जाने इतिहास बेचारा,
साखी हैं उनकी महिमा के
सूर्य चन्द्र भूगोल खगोल।
कलम, आज उनकी जय बोल



English Translation

Burning their bones, those who kept fire alive
Those who sacrificed themselves, without asking for a price
My pen, sing their praises

Those uncountable small lamps, lying in a corner in storm
Burned and died one day, without asking for any love
My pen, sing their praises

Fueled by whose bravery, all directions are angry
Afraid of whose brave chants, earth is still shaking
My pen, sing their praises

Blind against onslaught of flood light, what does history know
Whose glory is witnessed by, none other than Sun, Moon, Earth and Universe
My pen, sing their praises